Health News: अगर आप भी तबियत में थोड़ा सुधार होते ही एंटीबायोटिक दवाएं लेना बंद कर देते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। अक्सर लोग बुखार या संक्रमण कम होते ही दवा का कोर्स अधूरा छोड़ देते हैं। शारदा हॉस्पिटल के वरिष्ठ डॉक्टर ने चेतावनी दी है कि यह आदत आपकी सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। दवा का कोर्स बीच में छोड़ने से बीमारी के बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं होते हैं। यह गलती भविष्य में आपके शरीर को दवाइयों के प्रति बेअसर बना सकती है।
एंटीबायोटिक का कोर्स अधूरा छोड़ना क्यों है खतरनाक
शारदा हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. श्रेय श्रीवास्तव ने इस आम गलती पर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि जब मरीज एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा नहीं करते, तो बीमारी की जड़ शरीर में रह जाती है। मरीज को लगता है कि वह ठीक हो गया है, लेकिन असल में बैक्टीरिया केवल कमजोर पड़ते हैं, मरते नहीं हैं। ये बचे हुए बैक्टीरिया दोबारा सक्रिय हो सकते हैं। इससे आपको वही बीमारी दोबारा और ज्यादा गंभीर रूप में हो सकती है।
भविष्य में दवाइयां करना बंद कर देंगी असर
एंटीबायोटिक बीच में छोड़ने का सबसे बड़ा नुकसान भविष्य के इलाज पर पड़ता है। डॉ. श्रेय के अनुसार, जब आप कोर्स अधूरा छोड़ते हैं, तो जीवित बचे बैक्टीरिया दवा के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं। इसे मेडिकल भाषा में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि ये बैक्टीरिया ताकतवर हो जाते हैं। अगली बार जब आप बीमार पड़ेंगे, तो वही दवा उन पर काम नहीं करेगी। ऐसे में इलाज करना बहुत मुश्किल और महंगा हो जाता है।
डॉक्टर की सलाह के बिना न रोकें दवा
विशेषज्ञों की राय साफ है कि आपकी सेहत से बढ़कर कुछ नहीं है। भले ही आपको दो खुराक लेने के बाद बेहतर महसूस होने लगे, लेकिन डॉक्टर द्वारा निर्धारित कोर्स पूरा करना अनिवार्य है। जब तक डॉक्टर खुद दवा रोकने के लिए न कहें, तब तक एंटीबायोटिक लेते रहें। यह अनुशासन न केवल आपको मौजूदा बीमारी से पूरी तरह ठीक करेगा, बल्कि भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं से भी सुरक्षित रखेगा।
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