India News: आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में सदियों से जड़ी-बूटियों का विशेष महत्व रहा है। इन्हीं में से एक 'गोटू कोला' शरीर की कई समस्याओं को दूर करने वाली एक चमत्कारी औषधि है। गोल पत्तियों वाला यह छोटा सा हरा पौधा वैज्ञानिक रूप से 'सेंटेला एशियाटिका' कहलाता है। भारत में लोग इसे 'मंडूकपर्णी' के नाम से भी जानते हैं। यह मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाता है। श्रीलंका जैसे देशों में लोग इसका उपयोग सब्जी, सलाद और जूस के रूप में बड़े चाव से करते हैं।
पोषण का भंडार और विज्ञान की मुहर
अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन ने गोटू कोला के गुणों की पुष्टि की है। इस पौधे में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व होते हैं। ये तत्व शरीर को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से सुरक्षित रखते हैं। इसमें मौजूद औषधीय गुण त्वचा को स्वस्थ बनाने और पुराने घावों को जल्दी भरने में मदद करते हैं। यह पौधा जमीन के पास उगता है और इसकी पत्तियां काफी चमकीली होती हैं।
सुश्रुत संहिता में मंडूकपर्णी का वर्णन
प्राचीन ग्रंथ सुश्रुत संहिता में गोटू कोला को 'मंडूकपर्णी' कहा गया है। आयुर्वेद के अनुसार यह जड़ी-बूटी वात और पित्त को शांत करती है। इसे 'त्रिदोषक' गुणों वाली माना जाता है। इसका नियमित सेवन मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत करने के लिए भी जानी जाती है।
सावधानी और वैज्ञानिक शोध की स्थिति
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, इसके फायदों पर अभी और वैज्ञानिक शोध की जरूरत है। क्लिनिकल ट्रायल कम होने के कारण इसके दुष्प्रभावों को समझना अभी बाकी है। गोटू कोला प्रकृति का एक अनमोल उपहार है। हालांकि, इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पहले किसी विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है।
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