New Delhi: डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर केवल आपके दिल या किडनी को ही खराब नहीं करते, बल्कि ये आपकी सुनने की शक्ति भी छीन सकते हैं। दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) के ईएनटी विभाग के एचओडी प्रोफेसर डॉ. रवि मेहर ने इसे लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि बढ़ती उम्र के साथ यह खतरा और भी ज्यादा हो जाता है। शुगर और बीपी के मरीज अक्सर आवाज साफ न आने की शिकायत करते हैं, जिसका सीधा संबंध इन बीमारियों से हो सकता है।
डायबिटीज से सुनने की क्षमता पर असर
लंबे समय तक शुगर लेवल बढ़ा रहने से शरीर की नसों को भारी नुकसान पहुंचता है। डॉ. रवि के अनुसार, कान के अंदर मौजूद ऑडिटरी नर्व (Auditory Nerve) भी इसकी चपेट में आ सकती है। हाई शुगर के कारण कान की इन नसों में सूजन आ जाती है। इससे मरीज को धीरे-धीरे कम सुनाई देने लगता है। हालांकि, यह समस्या डायबिटीज के हर मरीज में नहीं होती। यह उन बुजुर्गों में ज्यादा देखने को मिलती है जिनका शुगर लेवल लंबे समय से कंट्रोल में नहीं है।
हाई बीपी और बहरापन
हाई ब्लड प्रेशर में बहरेपन का रिस्क सामान्यतः कम होता है। लेकिन अगर बीपी कंट्रोल में न रहे और अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो सुनने की क्षमता जा सकती है। इसे मेडिकल भाषा में 'सडन हियरिंग लॉस' (Sudden Hearing Loss) कहते हैं। डॉ. मेहर बताते हैं कि ऐसे मामले कम आते हैं, लेकिन गंभीर होते हैं। जिन लोगों को शुगर और हाई बीपी दोनों समस्याएं एक साथ हैं, उनके लिए यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
शरीर बहरेपन की शुरुआत में कुछ खास संकेत देता है, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है।
* आपसी बातचीत में शब्दों को समझने में परेशानी होना।
* फोन पर सामने वाले की आवाज साफ समझ न आना।
* कान में लगातार सीटी बजने (Tinnitus) जैसी आवाज आना।
* बात करने के लिए मोबाइल या टीवी का वॉल्यूम बार-बार बढ़ाना।
डॉक्टर से कब मिलें?
अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से मिलें। डॉक्टर कानों की जांच करके पता लगा सकते हैं कि सुनने की क्षमता कितनी कम हुई है। अगर सही समय पर इस समस्या पर ध्यान दिया जाए, तो स्थायी नुकसान को रोका जा सकता है। शुरुआती स्टेज में दवाओं और थेरेपी की मदद से सुनने की क्षमता में सुधार संभव है। इसलिए अपनी सेहत के साथ जरा भी लापरवाही न बरतें।
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