Himachal News: दुनिया भर में यात्रा के शौकीन अब अनजाने में अपने माता-पिता के पदचिह्नों पर चल रहे हैं। इसे विशेषज्ञ 'इनहेरिटूरिज्म' (Inheritourism) का नाम दे रहे हैं। यह शब्द 'इनहेरिट' (विरासत) और 'टूरिज्म' (पर्यटन) को मिलाकर बना है। हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि मिलेनियल्स और जेनरेशन-जेड (Gen-Z) अपनी छुट्टियों की योजना बनाते समय वही फैसले ले रहे हैं, जो कभी उनके माता-पिता लिया करते थे। चाहे होटल ब्रांड का चुनाव हो या घूमने का तरीका, बचपन की यादें अब युवाओं के ट्रैवल प्लान को गाइड कर रही हैं।
क्या है 'इनहेरिटूरिज्म' का असली मतलब?
इनहेरिटूरिज्म एक उभरता हुआ ट्रैवल ट्रेंड है। यह बताता है कि कैसे युवा पीढ़ी अपने परिवार की ट्रैवल आदतों को विरासत के रूप में अपना रही है। अक्सर हम वही होटल चुनते हैं जहाँ बचपन में रुकते थे। कई बार हम उन्हीं लॉयल्टी प्रोग्राम्स का हिस्सा बनते हैं जिनसे हमारे पेरेंट्स जुड़े थे। यह ट्रेंड केवल किसी जगह को देखने तक सीमित नहीं है। यह अपने परिवार की परंपराओं और सुखद यादों को फिर से जीने का एक भावनात्मक तरीका है।
यादों का सफर और गहरा जुड़ाव
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, बचपन की छुट्टियां हमारे दिमाग पर गहरी छाप छोड़ती हैं। जब हम बड़े होकर अकेले या दोस्तों के साथ घूमते हैं, तो वही पुराने अनुभव हमें सुरक्षा और खुशी का अहसास कराते हैं। इनहेरिटूरिज्म इसी जुड़ाव का नाम है। यह दिखाता है कि माता-पिता के साथ बिताया गया समय हमारे भविष्य के फैसलों को कैसे प्रभावित करता है। आज के दौर में युवा अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए इस स्टाइल को अपना रहे हैं।
आंकड़ों की जुबानी: क्यों बदल रहा है ट्रेंड?
एक विस्तृत सर्वे में इनहेरिटूरिज्म को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। यह डेटा साबित करता है कि माता-पिता की पसंद आज भी कितनी मायने रखती है:
* होटल की पसंद: लगभग 66 प्रतिशत यात्रियों ने माना कि उनके होटल चुनने के फैसले पर माता-पिता का प्रभाव होता है।
* घूमने का स्टाइल: करीब 70 प्रतिशत लोग अपने पेरेंट्स की तरह ही डेस्टिनेशन को एक्सप्लोर करना पसंद करते हैं।
* लॉयल्टी प्रोग्राम: 58 प्रतिशत युवा उन्हीं रिवॉर्ड्स और मेंबरशिप को चुनते हैं जो उनके परिवार में पहले से इस्तेमाल हो रही हैं।
यह रुझान स्पष्ट करता है कि आधुनिक सुविधाओं के बावजूद, लोग अपनी पुरानी यादों के करीब रहना चाहते हैं।
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