New Delhi News: भारत में डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं. महंगा इलाज आम आदमी की जेब खाली कर रहा है. लेकिन बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मरीजों को बड़ी राहत दी है. उन्होंने इन जानलेवा बीमारियों से निपटने के लिए सरकारी खजाना खोल दिया है. सरकार ने 'बायोफार्मा शक्ति' (Biopharma Shakti) योजना का ऐलान किया है. इससे महंगे इलाज और दवाओं के खर्च से मुक्ति मिलने की उम्मीद जागी है.
'बायोफार्मा शक्ति' से सस्ती होंगी दवाएं
वित्त मंत्री ने बजट 2026 में 'बायोफार्मा शक्ति' योजना की घोषणा की है. सरकार इस मिशन पर 10,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी. इसका मुख्य उद्देश्य भारत में ही बायोफार्मास्यूटिकल दवाओं का निर्माण बढ़ाना है. जब ये महंगी दवाएं देश में ही बनेंगी, तो इनकी कीमत अपने आप कम हो जाएगी. इससे कैंसर और डायबिटीज के मरीजों को सबसे ज्यादा फायदा होगा. यह कदम विदेशी दवाओं पर निर्भरता भी कम करेगा.
महंगा इलाज बना आम आदमी का दर्द
डायबिटीज, कैंसर और ऑटोइम्यून जैसी बीमारियों का इलाज लंबा चलता है. कैंसर के इंजेक्शन और डायबिटीज के लिए इंसुलिन का खर्च उठाना हर किसी के बस की बात नहीं है. कई बार इलाज के चक्कर में परिवार आर्थिक संकट में फंस जाते हैं. बजट 2026 में की गई यह पहल आम जनता के सिर से इस वित्तीय बोझ को कम करेगी. सरकार चाहती है कि पैसे की कमी के कारण किसी का इलाज न रुके.
जानलेवा बीमारियों का बढ़ता खतरा
भारत में गैर-संक्रामक बीमारियां (NCDs) अब महामारी का रूप ले रही हैं. आंकड़े बताते हैं कि 1990 में इन बीमारियों से होने वाली मौतों का प्रतिशत करीब 38 था. साल 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 62 फीसदी हो गया. यह वृद्धि डराने वाली है. बजट 2026 में स्वास्थ्य क्षेत्र पर दिया गया जोर इसी संकट को हल करने की एक कोशिश है. हेल्थ सिस्टम को अब इन चुनौतियों से लड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है.
भारत बनेगा दवाओं का ग्लोबल हब
भारत पहले से ही जेनरिक दवाओं के मामले में दुनिया में आगे है. अब सरकार चाहती है कि हम नई तकनीकों और बायोलॉजिक्स में भी नंबर वन बनें. 'बायोफार्मा शक्ति' योजना से घरेलू मांग तो पूरी होगी ही, साथ ही वैश्विक बाजार में भी भारत की धाक जमेगी. अगर बजट 2026 की यह योजना सही तरह से लागू हुई, तो यह देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी.
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