समुद्र में पत्थर से नहीं, बल्कि इस जीव के पेट में बनता है 'मोती', प्रक्रिया जानकर चौंक जाएंगे आप

Science News: पृथ्वी पर पाए जाने वाले रत्नों में मोती का स्थान बेहद खास है। यह अपनी चमक और सुंदरता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह किसी खदान या चट्टान से नहीं निकलता है? यह समुद्र के अंदर एक जीवित जीव के पेट में बनता है। हीरे और सोने के विपरीत, इसका निर्माण एक प्राकृतिक रक्षा तंत्र के जरिए होता है। विज्ञान की दुनिया में यह प्रक्रिया बेहद हैरान करने वाली है। आइए जानते हैं कि आखिर समुद्र की गहराइयों में यह कीमती रत्न कैसे तैयार होता है।

बेहद दर्दनाक होती है मोती बनने की शुरुआत

एक चमकदार मोती के बनने के पीछे की कहानी एक हादसे से शुरू होती है। सीप या मोलस्क जैसे समुद्री जीवों का शरीर बहुत कोमल होता है। जब समुद्र में तैरता हुआ कोई बाहरी कण, जैसे रेत का दाना या छोटा पत्थर, गलती से सीप के अंदर चला जाता है, तो उसे बहुत तकलीफ होती है। यह बाहरी कण उसके शरीर में चुभने लगता है और उसे जलन महसूस होती है। सीप के पास हाथ-पैर नहीं होते, इसलिए वह इस कण को आसानी से बाहर नहीं निकाल पाता है।

खुद को बचाने के लिए कवच बनाता है जीव

इस जलन और दर्द से बचने के लिए सीप का शरीर एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच तैयार करता है। वह अपने शरीर से एक खास तरह का तरल पदार्थ छोड़ना शुरू कर देता है। विज्ञान की भाषा में इस पदार्थ को 'नेकर' या 'मदर ऑफ पर्ल' कहा जाता है। यह नेकर कैल्शियम कार्बोनेट और कोंचिओलिन से बना होता है। सीप इस चिकने पदार्थ की परतें उस चुभने वाले कण के ऊपर चढ़ाना शुरू कर देता है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे हम किसी घाव पर मरहम लगाते हैं।

सालों की मेहनत के बाद मिलती है चमक

यह प्रक्रिया एक या दो दिन की नहीं होती है। नेकर की हजारों सूक्ष्म परतें उस कण के चारों तरफ जमा होती रहती हैं। इसमें महीनों और कभी-कभी कई सालों का वक्त भी लग जाता है। समय के साथ परत-दर-परत चढ़ने से वह खुरदरा कण एक गोल और चमकदार मोती में बदल जाता है। मोती का आकार और चमक इस बात पर निर्भर करती है कि नेकर की परतें कितनी सफाई से जमी हैं। जितना ज्यादा समय लगता है, इसकी गुणवत्ता उतनी ही बेहतरीन होती है।

क्यों करोड़ों में बिकते हैं असली मोती?

समुद्र में प्राकृतिक रूप से मोती का बनना एक दुर्लभ घटना मानी जाती है। यह पूरी तरह से संयोग पर निर्भर करता है कि कब कोई कण सीप के अंदर जाएगा और यह प्रक्रिया शुरू होगी। इसी वजह से असली और प्राकृतिक मोती बाजार में बहुत महंगे बिकते हैं। आजकल बाजार में दिखने वाले ज्यादातर रत्न 'कल्चर्ड' होते हैं। इसमें इंसान जानबूझकर सीप के अंदर एक बाहरी कण डालता है और नियंत्रित माहौल में इस प्रक्रिया को पूरा करवाता है।

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