शोले की मौसी लीला मिश्रा, लकवा मारने के बाद भी की शूटिंग, 73 में जीता अवॉर्ड
Bollywood Classics: भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी ब्लॉकबस्टर फिल्मों का जिक्र होता है, तो 'शोले' का नाम सबसे ऊपर आता है। जय और वीरू की जय-वीरू वाली पक्की दोस्ती हो, ठाकुर का वो बिना हाथों वाला खौफनाक रौब हो, या फिर गब्बर सिंह का 'कितने आदमी थे?' वाला डायलॉग, इस फिल्म का हर एक सीन हमारे दिमाग में छपा हुआ है। लेकिन जरा सोचिए, जब जय (अमिताभ बच्चन) अपने दोस्त वीरू (धर्मेंद्र) की शादी का रिश्ता लेकर जाता है, तो सामने कौन बैठी होती है? जी हां, वो सफेद साड़ी वाली सख्त लेकिन बेहद क्यूट 'मौसी'! आज हम बॉलीवुड की उसी फेवरेट मौसी यानी लीला मिश्रा के बारे में बात करने वाले हैं। एक ऐसी अभिनेत्री जो रील लाइफ में जितनी सीधी-सादी दिखती थीं, रियल लाइफ में उतनी ही बड़ी 'बॉस लेडी' थीं। क्या आप जानते हैं कि उन्होंने लकवा (Paralysis) मारने के बाद भी शूटिंग की थी? आइए, आपको इस लेजेंड्री एक्ट्रेस के ऐसे किस्से बताते हैं जिन्हें सुनकर आप आज के स्टार्स के नखरे भूल जाएंगे
Overview:
लीला मिश्रा बॉलीवुड की वो इकलौती अदाकारा थीं जिन्होंने साबित कर दिया कि एक्टिंग का कीड़ा अगर एक बार काट ले, तो इंसान उम्र और बीमारी दोनों को चकमा दे सकता है! 200 से ज्यादा फिल्मों में काम, 73 साल की उम्र में बेस्ट एक्ट्रेस का धांसू अवॉर्ड, और आधी बॉडी में लकवा मारने के बावजूद कैमरे के सामने खड़े होने का जिगरा। यह कहानी किसी एक्शन हीरो की नहीं, बल्कि हमारी प्यारी 'मौसी' की है। कुर्सी की पेटी बांध लीजिए, क्योंकि लीला जी का यह सफर आपको हंसाने के साथ-साथ आपके रोंगटे भी खड़े कर देगा।
बॉलीवुड की असली 'मौसी' और 'नानी' - लीला मिश्रा का जलवा
आजकल के एक्टर्स दो-चार फिल्में करके खुद को सुपरस्टार समझने लगते हैं, लेकिन लीला मिश्रा जी का स्वैग ही अलग था। उन्होंने पांच दशकों (50 साल) से भी ज्यादा समय तक फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया। इन 50 सालों में उन्होंने 200 से अधिक फिल्मों में अपनी शानदार एक्टिंग का जलवा बिखेरा। उन्होंने ज्यादातर फिल्मों में मौसी, ताई, नानी, या दादी का किरदार निभाया। लेकिन उनके अभिनय में इतनी जान होती थी कि कभी-कभी तो मेन हीरो-हीरोइन भी उनके सामने फीके पड़ जाते थे।
चाहे कॉमेडी हो या इमोशनल सीन, लीला जी के चेहरे के एक्सप्रेशंस इतने सटीक होते थे कि दर्शक खुद को उनसे जुड़ा हुआ महसूस करते थे। वह बॉलीवुड की उन चंद कलाकारों में से एक थीं जिन्होंने अपनी आखिरी सांस तक सिर्फ और सिर्फ अपनी कला और सिनेमा के लिए काम किया। उनके लिए सेट पर जाना किसी मंदिर में जाने जैसा था।
शोले की 'बसंती की मौसी' - जिसने जय को भी चने चबवा दिए
साल 1975 में रिलीज हुई फिल्म 'शोले' को कौन भूल सकता है! इस फिल्म में लीला मिश्रा ने 'बसंती (हेमा मालिनी) की मौसी' का ऐसा आइकॉनिक किरदार निभाया कि लोग आज तक उन्हें उसी नाम से पुकारते हैं। जब जय, वीरू का रिश्ता लेकर मौसी के पास जाता है और घुमा-फिरा कर वीरू की बुराइयां (जैसे शराब पीना, जुआ खेलना) करता है, उस वक्त मौसी के जो रिएक्शंस थे, वो सच में मास्टरपीस हैं।
उस सीन में मौसी का वो डायलॉग और उनका परेशान होने वाला अंदाज लोगों को पेट पकड़कर हंसने पर मजबूर कर देता है। पूरी फिल्म में सफेद सूती साड़ी पहने, चश्मा लगाए मौसी ने गब्बर की टेंशन के बीच दर्शकों को जो कॉमिक रिलीफ दिया, वो कोई और कर ही नहीं सकता था।
73 साल की उम्र में बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड - युवाओं को दी कड़ी टक्कर
आमतौर पर 60-65 की उम्र के बाद लोग रिटायरमेंट ले लेते हैं, तीर्थ यात्रा पर निकल जाते हैं, या फिर घर पर बैठकर पोते-पोतियों के साथ खेलते हैं। लेकिन लीला मिश्रा जी किस मिट्टी की बनी थीं, यह उन्होंने 1981 में आई अपनी फिल्म 'नानी मां' से साबित कर दिया।
- कमाल का प्रदर्शन: फिल्म 'नानी मां' में उनका किरदार इतना दमदार और दिल छू लेने वाला था कि क्रिटिक्स भी उनके दीवाने हो गए।
- बेस्ट एक्ट्रेस का खिताब: इस फिल्म के लिए उन्हें 73 वर्ष की आयु में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (Best Actress) का प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला।
- प्रेरणा का स्रोत: यह इंडस्ट्री के उन सभी युवा कलाकारों के लिए एक करारा तमाचा (प्यार वाला) था जो सोचते थे कि एक्टिंग सिर्फ जवानी का खेल है।
जब लकवा भी उनके एक्टिंग के जुनून को ना रोक सका
अब बात करते हैं उस किस्से की जिसे सुनकर दिग्गज फिल्म मेकर भी दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। मशहूर फिल्म निर्माता साईं परांजपे ने एक पुराने इंटरव्यू में लीला मिश्रा के समर्पण (Dedication) का एक ऐसा किस्सा सुनाया जो रोंगटे खड़े कर देता है। यह बात उनके जीवन के अंतिम दिनों की है जब वह अपनी आखिरी फिल्म 'दाता' की शूटिंग कर रही थीं।
साईं परांजपे के मुताबिक, फिल्म 'दाता' के सेट पर शूटिंग के दौरान अचानक लीला जी की तबीयत बिगड़ी और उन्हें लकवा (Paralysis Attack) मार गया। लकवे की वजह से उनके शरीर के आधे हिस्से ने काम करना पूरी तरह से बंद कर दिया था। आप सोच सकते हैं कि उस वक्त सेट पर कैसा माहौल होगा? पूरी क्रू में दहशत फैल गई, डायरेक्टर परेशान हो गए, और हर कोई यही कह रहा था कि शूटिंग को तुरंत रोककर लीला जी को वापस मुंबई अस्पताल भेजा जाए।
असली 'परफेक्शनिस्ट' की जिद और जज्बा
आज के दौर में अगर किसी एक्टर को सर्दी-जुकाम भी हो जाए, तो शूटिंग कैंसिल हो जाती है। लेकिन लीला मिश्रा जी एक अलग ही लीग की लेजेंड थीं। जब सेट पर उन्हें इलाज के लिए वापस भेजने की तैयारी हो रही थी, तब अभिनेत्री ने जो कहा उसने सबको रुला दिया। लीला जी अपनी उस गंभीर हालत से बिल्कुल भी नहीं घबराईं। उन्होंने बड़ी ही शालीनता से कैमरा क्रू से अनुरोध किया, "मुझे उस तरफ से शूट करो जहां मेरी हालत ठीक है और लकवे का असर नहीं दिख रहा है।"
उन्होंने साफ कह दिया कि वह अपना काम अधूरा छोड़कर नहीं जाएंगी। और यकीन मानिए, उन्होंने वैसा ही किया! आधी बॉडी लकवाग्रस्त होने के बावजूद उन्होंने अपने बचे हुए सीन्स की शूटिंग पूरी की। यह एक कलाकार का अपनी कला के प्रति वह पागलपन था, जो सदियों में किसी एक के अंदर देखने को मिलता है।
बिना फॉर्मल ट्रेनिंग के बनीं एक्टिंग की 'प्रोफेसर'
साईं परांजपे ने 1983 में आई अपनी मशहूर फिल्म 'कथा' और कल्ट क्लासिक फिल्म 'चश्मे बद्दूर' में लीला मिश्रा के साथ काम करने के अनुभव भी साझा किए थे। साईं के अनुसार, लीला जी एक बेजोड़ व्यावसायिकता (Professionalism) की मिसाल थीं।
- कोई फिल्मी स्कूल नहीं: लीला जी ने कभी किसी बड़े एक्टिंग स्कूल से कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली थी, फिर भी उन्हें फिल्म निर्माण, कैमरे के एंगल और लाइटिंग की इतनी गहरी समझ थी कि बड़े-बड़े टेक्नीशियन हैरान रह जाते थे।
- समय की पाबंदी: वह समय की इतनी पक्की थीं कि अगर कॉल टाइम सुबह 7 बजे का है, तो वह 6:45 पर मेकअप रूम में तैयार मिलती थीं।
- रचनात्मकता का तड़का: 'चश्मे बद्दूर' के दौरान लड़कों के घर की सीढ़ियां चढ़ने वाले सीन में उन्होंने खुद के कई छोटे-छोटे इम्प्रोवाइजेशन किए, जिससे सीन और भी ज्यादा रियल और फनी बन गया।
एक शानदार सफर का अंत
फिल्म 'दाता' की उस मुश्किल शूटिंग को पूरा करने के बाद ही लीला जी मुंबई लौटीं। लेकिन लकवे का अटैक काफी गंभीर था। मुंबई आने के कुछ ही समय बाद इस महान अदाकारा ने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन की खबर से पूरे फिल्म उद्योग में गहरा शोक छा गया था। लेकिन लीला मिश्रा रोने-धोने वाली विरासत नहीं, बल्कि प्रेरणा, हिम्मत और हंसी की एक ऐसी विरासत छोड़कर गईं, जिसे बॉलीवुड कभी नहीं भूल सकता।
निष्कर्ष (Conclusion)
लीला मिश्रा सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं थीं, बल्कि वह एक पूरी संस्था थीं। 'शोले' की बसंती की मौसी से लेकर 'नानी मां' तक का उनका सफर यह बताता है कि असली टैलेंट किसी उम्र, सूरत या बीमारी का मोहताज नहीं होता। लकवा मारने के बाद भी आधी बॉडी से एक्टिंग करना एक ऐसा अदम्य साहस है जिसे सुनकर आज भी लोगों का सिर सम्मान से झुक जाता है। बॉलीवुड में शायद कई मौसियां और दादियां आएंगी, लेकिन लीला मिश्रा जैसी 'लीजेंड' दोबारा पैदा नहीं होगी।
क्या आपको 'शोले' का वो मजेदार जय और मौसी वाला सीन याद है? लीला जी का कौन सा किरदार आपका सबसे फेवरेट है? हमें कमेंट्स में जरूर बताएं और बॉलीवुड की ऐसी ही अनसुनी व रोचक कहानियों के लिए हमारे ब्लॉग को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें फॉलो करना न भूलें!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: लीला मिश्रा को बॉलीवुड में सबसे ज्यादा किस रोल के लिए जाना जाता है?
उत्तर: लीला मिश्रा को 1975 की सुपरहिट फिल्म 'शोले' में 'बसंती की मौसी' का आइकॉनिक रोल निभाने के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है।
प्रश्न 2: लीला मिश्रा ने अपने फिल्मी करियर में कितनी फिल्मों में काम किया था?
उत्तर: लीला मिश्रा ने पांच दशकों (50 साल) से अधिक लंबे अपने करियर में लगभग 200 से अधिक फिल्मों में काम किया था।
प्रश्न 3: लीला मिश्रा को किस फिल्म के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला था?
उत्तर: उन्हें 1981 में आई फिल्म 'नानी मां' में उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए बेस्ट एक्ट्रेस (सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री) का अवॉर्ड मिला था।
प्रश्न 4: जब लीला मिश्रा को बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला, तब उनकी उम्र क्या थी?
उत्तर: फिल्म 'नानी मां' के लिए जब उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला, तब उनकी उम्र 73 वर्ष थी।
प्रश्न 5: लीला मिश्रा की आखिरी फिल्म कौन सी थी?
उत्तर: लीला मिश्रा की आखिरी फिल्मों में से एक 'दाता' थी, जिसकी शूटिंग के दौरान ही उनकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई थी।
प्रश्न 6: फिल्म 'दाता' के सेट पर लीला मिश्रा के साथ क्या हादसा हुआ था?
उत्तर: 'दाता' फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट पर ही लीला मिश्रा को लकवा (Paralysis) मार गया था, जिससे उनके शरीर का आधा हिस्सा काम करना बंद कर दिया था।
प्रश्न 7: लकवा मारने के बाद लीला मिश्रा ने शूटिंग रोक दी थी?
उत्तर: बिल्कुल नहीं! लकवा मारने के बावजूद उन्होंने क्रू से कहा कि वे उन्हें उस तरफ से शूट करें जिधर उनका चेहरा ठीक है, और उन्होंने अपनी शूटिंग पूरी की।
प्रश्न 8: मशहूर निर्माता साईं परांजपे ने लीला मिश्रा के बारे में क्या कहा था?
उत्तर: साईं परांजपे ने उन्हें बेजोड़ व्यावसायिकता (Professionalism), समर्पण और समय की पाबंदी की साक्षात मूर्ति बताया था।
प्रश्न 9: क्या लीला मिश्रा ने कोई एक्टिंग की फॉर्मल ट्रेनिंग ली थी?
उत्तर: जी नहीं, लीला मिश्रा के पास कोई औपचारिक (Formal) एक्टिंग की शिक्षा नहीं थी, फिर भी उन्हें फिल्म निर्माण की कमाल की समझ थी।
प्रश्न 10: साईं परांजपे के साथ लीला मिश्रा ने किन प्रसिद्ध फिल्मों में काम किया था?
उत्तर: लीला मिश्रा ने साईं परांजपे के निर्देशन में बनी बेहतरीन फिल्मों 'कथा' (1983) और 'चश्मे बद्दूर' में काम किया था।