पाकिस्तान में आशा भोंसले को श्रद्धांजलि देने पर बवाल
International News: संगीत की दुनिया की 'मल्लिका' और अपनी सुरीली आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली Asha Bhosle के निधन की खबर ने जहां पूरी दुनिया की आंखों में आंसू ला दिए हैं, वहीं सरहद पार पाकिस्तान में एक अजीबोगरीब और शर्मनाक विवाद खड़ा हो गया है। यकीन मानिए, जहां मौत पर दुश्मन भी सर झुका लेते हैं, वहां पाकिस्तान के मीडिया रेगुलेटर PEMRA ने एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल को सिर्फ इसलिए 'कारण बताओ' नोटिस थमा दिया क्योंकि उसने आशा ताई को श्रद्धांजलि दी थी। यह मामला अब इतना तूल पकड़ चुका है कि कला और नफरत के बीच एक नई जंग छिड़ गई है। आखिर एक महान कलाकार को याद करना पाकिस्तान में 'जुर्म' कैसे बन गया? आइए, जानते हैं इस कड़वी हकीकत की पूरी दास्तान।
Overview:
कहते हैं कि संगीत की कोई सरहद नहीं होती, लेकिन पाकिस्तान के अधिकारियों ने शायद इस कहावत को कभी सुना ही नहीं। आशा भोंसले, जिन्होंने नुसरत फतेह अली खान के साथ सुर मिलाए और जो नूर जहां को अपनी बड़ी बहन मानती थीं, उनकी मौत पर शोक मनाना पाकिस्तान में कानूनी पचड़े का सबब बन गया है। एक तरफ जहां चैनल के डायरेक्टर ने सीना ठोक कर कला का बचाव किया है, वहीं दूसरी तरफ रेगुलेटर लाइसेंस छीनने की धमकी दे रहा है। यह सस्पेंस और विवाद से भरी खबर आपको सोचने पर मजबूर कर देगी कि क्या वाकई सियासत सुरों से बड़ी हो सकती है?
PEMRA का 'हंटर': आशा ताई की कवरेज पर भड़का पाकिस्तान
मामला कुछ यूं है कि जब आशा भोंसले के निधन की खबर आई, तो पाकिस्तान के मशहूर न्यूज चैनल 'जियो न्यूज' ने एक महान कलाकार को सम्मान देते हुए उनके जीवन और संगीत पर एक स्पेशल कवरेज दिखाई। इस कवरेज में आशा जी के कुछ सुपरहिट गानों की क्लिप्स और उनके वीडियो विजुअल्स का इस्तेमाल किया गया था।
बस, यही बात पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटर अथॉरिटी (PEMRA) को चुभ गई। उन्होंने तुरंत 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर दिया। PEMRA का तर्क है कि साल 2019 में भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय कंटेंट पर पूरी तरह बैन लगा दिया था। ऐसे में आशा भोंसले के गाने दिखाना उस कानून का उल्लंघन है। मतलब हद है! अब कलाकारी को भी पासपोर्ट और वीजा की जरूरत पड़ेगी?
मैनेजिंग डायरेक्टर अजहर अब्बास का करारा पलटवार
इस नोटिस के मिलने के बाद जियो न्यूज के मैनेजिंग डायरेक्टर अजहर अब्बास चुप नहीं बैठे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (ट्विटर) पर PEMRA को जो धोया है, उसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। उन्होंने साफ कहा कि एक महान कलाकार के काम का सम्मान करना मीडिया की परंपरा है और उन्हें इस बात का पछतावा है कि उन्होंने आशा जी के और ज्यादा गाने क्यों नहीं दिखाए!
- कला का सम्मान: अब्बास ने लिखा कि जब भी किसी लेजेंड का निधन होता है, तो उनकी विरासत को दिखाना हमारा कर्तव्य है।
- भारत-पाक कनेक्शन: उन्होंने याद दिलाया कि आशा भोंसले पाकिस्तान की मल्लिका-ए-तरन्नुम नूर जहां की बहुत बड़ी फैन थीं और उन्हें अपनी बड़ी बहन मानती थीं।
- नफरत के खिलाफ सुर: अब्बास का तर्क है कि कलाकार ही वो लोग होते हैं जो दो देशों के बीच की नफरत को कम करते हैं, उन्हें राजनीति में घसीटना गलत है।
लाइसेंस रद्द करने की धमकी: 'जुर्म' है सुरीली आवाज सुनना?
पाकिस्तान का मीडिया रेगुलेटर इस समय 'सुपर विलेन' मोड में नजर आ रहा है। उन्होंने जियो न्यूज की मालिकाना कंपनी 'मेसर्स इंडिपेंडेंट मीडिया कॉर्पोरेशन' के सीईओ को अल्टीमेटम दे दिया है।
- 14 दिन की मोहलत: चैनल को 14 दिनों के भीतर लिखित जवाब देना होगा कि उन्होंने भारतीय गाने क्यों चलाए।
- पेशी की तारीख: सीईओ को 27 अप्रैल तक व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया है।
- कठोर सजा: PEMRA ने चेतावनी दी है कि अगर जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो चैनल पर करोड़ों का जुर्माना लगाया जा सकता है या उनका ब्रॉडकास्टिंग लाइसेंस ही हमेशा के लिए रद्द किया जा सकता है।
क्या कला को सीमाओं में बांधा जा सकता है?
यह विवाद केवल एक नोटिस का नहीं है, बल्कि उस मानसिकता का है जो संगीत और संस्कृति को भी जंग का मैदान बना देती है। आशा भोंसले ने दशकों तक अपनी आवाज से दक्षिण एशिया को जोड़ा है। उन्होंने पाकिस्तान के दिग्गज नुसरत फतेह अली खान के साथ 'अफ्रिन अफ्रिन' जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम किया था। जब कोई कलाकार गुजरता है, तो वह केवल एक देश का नहीं होता, वह पूरी मानवता की धरोहर होता है। पाकिस्तान में इस तरह का विरोध दिखाता है कि वहां की संस्थाएं कला के प्रति कितनी संकीर्ण सोच रखती हैं।
पाकिस्तानी जनता और सोशल मीडिया का रुख
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान की आम जनता के बीच आशा भोंसले के करोड़ों चाहने वाले हैं। सोशल मीडिया पर कई पाकिस्तानी यूजर्स ने PEMRA के इस कदम को 'बेवकूफी भरा' करार दिया है। लोगों का कहना है कि जब पूरा देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है, तब सरकार और संस्थाओं को एक संगीत की क्लिप से खतरा महसूस हो रहा है।
निष्कर्ष (Conclusion)
आशा भोंसले का निधन संगीत के एक युग का अंत है। पाकिस्तान में इस पर हुआ विवाद यह साबित करता है कि राजनीति किस हद तक गिर सकती है। कला और कलाकार हमेशा नफरत की दीवारों को गिराने का काम करते हैं, लेकिन PEMRA जैसे संस्थान उन दीवारों को और ऊंचा करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, अजहर अब्बास जैसे पत्रकारों ने यह दिखा दिया है कि सच बोलने की हिम्मत अभी भी जिंदा है।
आपकी क्या राय है? क्या किसी महान कलाकार को श्रद्धांजलि देना कानूनी रूप से गलत हो सकता है? क्या संगीत को सीमाओं में बांधना मुमकिन है? हमें कमेंट्स में जरूर बताएं। इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और हमें फॉलो करना न भूलें!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: पाकिस्तान में आशा भोंसले की कवरेज पर विवाद क्यों हुआ?
उत्तर: पाकिस्तान के मीडिया रेगुलेटर PEMRA ने भारतीय गानों और विजुअल्स को दिखाने को सुप्रीम कोर्ट के बैन का उल्लंघन माना और चैनल को नोटिस जारी कर दिया।
प्रश्न 2: किस पाकिस्तानी न्यूज चैनल को नोटिस भेजा गया है?
उत्तर: प्रतिष्ठित न्यूज नेटवर्क 'जियो न्यूज' (Geo News) को यह नोटिस भेजा गया है।
प्रश्न 3: PEMRA क्या है?
उत्तर: PEMRA का पूरा नाम 'पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी' है, जो वहां के टीवी और रेडियो चैनलों की निगरानी करती है।
प्रश्न 4: जियो न्यूज के एमडी अजहर अब्बास ने क्या जवाब दिया?
उत्तर: उन्होंने कहा कि आशा भोंसले जैसी महान कलाकार का सम्मान करना उनकी परंपरा है और कला को राजनीति से दूर रखना चाहिए।
प्रश्न 5: पाकिस्तान में भारतीय कंटेंट पर बैन कब से है?
उत्तर: साल 2019 में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद पाकिस्तान ने भारतीय फिल्मों और मीडिया कंटेंट पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।
प्रश्न 6: आशा भोंसले का पाकिस्तान के किस कलाकार से खास रिश्ता था?
उत्तर: आशा भोंसले पाकिस्तान की दिग्गज गायिका नूर जहां की प्रशंसक थीं और उन्हें अपनी बड़ी बहन मानती थीं।
प्रश्न 7: PEMRA ने चैनल को कितनी मोहलत दी है?
उत्तर: PEMRA ने लिखित जवाब देने के लिए 14 दिन का समय दिया है और 27 अप्रैल तक पेश होने को कहा है।
प्रश्न 8: नियम का उल्लंघन करने पर क्या सजा हो सकती है?
उत्तर: चैनल पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है या उसका प्रसारण लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
प्रश्न 9: क्या आशा भोंसले ने पाकिस्तानी गायकों के साथ काम किया था?
उत्तर: जी हाँ, उन्होंने उस्ताद नुसरत फतेह अली खान सहित कई दिग्गज पाकिस्तानी संगीतकारों के साथ सहयोग किया था।
प्रश्न 10: इस नोटिस का आधार क्या है?
उत्तर: PEMRA ने साल 2015 की आचार संहिता और पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया है।