गर्मियों में सत्तू का शरबत या छाछ, किसे पीने से शरीर में आएगी जान।
Summer Health: बढ़ती गर्मी में शरीर का हाल बेहाल हो जाता है। धूप और पसीने के कारण शरीर जल्दी थक जाता है। इस मौसम में प्यास भी बहुत लगती है, जिससे कई बार कमजोरी भी होती है। ऐसे में हर किसी को ठंडे की तलाश रहती है। भारतीय घरों में पुराने समय से दो सबसे लोकप्रिय ड्रिंक्स का इस्तेमाल होता है। ये ड्रिंक्स सत्तू का शरबत और छाछ हैं। ये दोनों ही ड्रिंक्स प्राकृतिक, सस्ते और सेहतमंद माने जाते हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि चिलचिलाती गर्मी के मौसम में असल में बेहतर कौन सा है? इसका सही जवाब आपकी दिनचर्या, शारीरिक जरूरत और स्वास्थ्य के लक्ष्यों पर निर्भर करता है। आज हम इन दोनों ड्रिंक्स के फायदे, इनमें मुख्य अंतर और इन्हें पीने के सही समय को विस्तार से समझेंगे।विस्तृत सारांश (Executive Summary)
गर्मी के मौसम में शरीर को स्वस्थ रखना एक बड़ी चुनौती है। इस मौसम में डिहाइड्रेशन, शरीर की एनर्जी कम होना और पाचन तंत्र का खराब होना आम समस्याएं हैं। गर्मी से बचने के लिए लोग कई तरह के कोल्ड ड्रिंक्स पीते हैं। लेकिन बाजार में मिलने वाले ये ड्रिंक्स सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में सत्तू का शरबत और छाछ सबसे बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प हैं। सत्तू और छाछ दोनों के अपने-अपने खास फायदे हैं। सत्तू शरीर को भरपूर एनर्जी और तृप्ति देता है। दूसरी तरफ, छाछ पेट को हल्का करती है और गैस से तुरंत राहत प्रदान करती है। सत्तू मुख्य रूप से भुने हुए चने को पीसकर तैयार किया जाता है। इसलिए सत्तू में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और जटिल कार्बोहाइड्रेट (Complex Carbohydrates) पाए जाते हैं। यह शरीर को तुरंत ताकत देता है। सत्तू पीने के बाद लंबे समय तक भूख नहीं लगती है। धूप में काम करने वालों के लिए यह एक वरदान है। यह शरीर को अंदर से ठंडा रखता है। इसके विपरीत छाछ दही से बनाई जाती है। छाछ बहुत ही हल्की-फुल्की होती है। यह हमारे पाचन तंत्र को बहुत बेहतर बनाती है। अगर आपको एसिडिटी या गैस की समस्या है, तो छाछ तुरंत आराम देती है। भारी खाना खाने के बाद छाछ सबसे अच्छी मानी जाती है। अगर हम इन दोनों की तुलना करें, तो दोनों के काम अलग-अलग हैं। गर्मी में डिहाइड्रेशन का खतरा सबसे ज्यादा होता है। छाछ शरीर को जल्दी हाइड्रेट करती है। इसमें प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स, पानी, सोडियम और पोटैशियम मौजूद होते हैं। सत्तू भी पानी की कमी दूर करता है। लेकिन सत्तू थोड़ा गाढ़ा होता है, इसलिए यह छाछ जितना तेज असर नहीं दिखाता है। अगर आप सुबह नाश्ता कर रहे हैं या घर से बाहर धूप में जा रहे हैं, तो सत्तू पिएं। अगर आप लंच कर चुके हैं और पेट को आराम देना चाहते हैं, तो छाछ पिएं। वजन कम करने वालों के लिए छाछ एक बेहतरीन विकल्प है। छाछ में कैलोरी बहुत कम होती है। यह वजन घटाने में मदद करती है। लेकिन अगर आप कमजोरी दूर करना चाहते हैं और हेल्दी तरीके से वजन मेंटेन करना चाहते हैं, तो सत्तू का चुनाव करें।सत्तू का शरबत: गरीबों का प्रोटीन और सेहत का खजाना
सत्तू भारत का एक पारंपरिक सुपरफूड है। इसे मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में बहुत पसंद किया जाता है। सत्तू भुने हुए चने से तैयार होता है। इसका स्वाद बहुत ही लाजवाब होता है। आप इसे मीठा या नमकीन दोनों तरह से बना सकते हैं।सत्तू के प्रमुख फायदे
प्रोटीन का पावरहाउस: सत्तू में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है। यह मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन का सबसे अच्छा और सस्ता स्रोत है।फाइबर से भरपूर: भुने चने में फाइबर बहुत अधिक होता है। सत्तू पीने से पेट साफ रहता है। यह कब्ज जैसी पेट की बीमारियों को जड़ से खत्म करता है।
तुरंत एनर्जी देता है: सत्तू में मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट शरीर को धीरे-धीरे एनर्जी देते हैं। इसे पीने से लंबे समय तक कमजोरी महसूस नहीं होती है।
शरीर को ठंडक देता है: सत्तू की तासीर ठंडी होती है। यह लू (Heat stroke) से बचाने में बहुत मददगार है। यह शरीर के तापमान को सामान्य रखता है।
डायबिटीज में फायदेमंद: सत्तू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम होता है। यह ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ने नहीं देता। इसलिए डायबिटीज के मरीज भी इसे आराम से पी सकते हैं।
भूख को कंट्रोल करता है: गाढ़ा होने के कारण सत्तू पेट को लंबे समय तक भरा हुआ रखता है। बार-बार भूख लगने की आदत इससे कम हो जाती है।
छाछ (मट्ठा): आयुर्वेद का अमृत और हाइड्रेशन का पावरहाउस
छाछ को आयुर्वेद में 'तक्र' कहा जाता है। आयुर्वेद में इसे देवताओं का पेय माना गया है। छाछ दही से बनती है। इसमें से मक्खन निकाल लिया जाता है, इसलिए इसमें फैट बहुत कम होता है। यह स्वाद में थोड़ी खट्टी और बहुत ही रिफ्रेशिंग होती है।छाछ के खास गुण और फायदे
पाचन तंत्र के लिए वरदान: छाछ में लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus) जैसे गुड बैक्टीरिया होते हैं। ये प्रोबायोटिक्स आंतों (Gut health) को मजबूत बनाते हैं। इससे खाना आसानी से पच जाता है।एसिडिटी से तुरंत राहत: मसालेदार खाना खाने के बाद पेट में जलन होती है। छाछ पेट को ठंडक पहुंचाती है। यह एसिडिटी और गैस में भी आराम देती है।
कैल्शियम का अच्छा स्रोत: छाछ में दूध और दही की तरह ही कैल्शियम पाया जाता है। यह हमारी हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन: गर्मियों में पसीने के रास्ते शरीर से नमक बाहर निकल जाता है। छाछ में मौजूद सोडियम और पोटैशियम इस कमी को तेजी से पूरा करते हैं।
हल्कापन महसूस कराती है: खाने के बाद भारीपन महसूस हो तो छाछ सबसे अच्छा विकल्प है। यह पेट को बिल्कुल हल्का और आरामदायक रखती है।
ब्लड प्रेशर को कम करती है: नियमित रूप से छाछ पीने से हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में काफी मदद मिलती है।
हाइड्रेशन के मामले में कौन आगे है?
गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन या शरीर में पानी की कमी सबसे बड़ा खतरा है। हाइड्रेशन के मामले में सत्तू और छाछ दोनों ही अच्छे हैं। लेकिन छाछ इस मामले में थोड़ी बेहतर मानी जाती है। छाछ में 90% से ज्यादा पानी होता है। इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं। जब आप गर्मी में पसीने से तरबतर होते हैं, तो छाछ शरीर को तुरंत हाइड्रेट करती है। यह कोशिकाओं तक तेजी से पानी पहुंचाती है। सत्तू भी हाइड्रेशन में पूरी मदद करता है। लेकिन सत्तू पानी में घुलने के बाद काफी गाढ़ा हो जाता है। यह भरपेट होने के कारण तरल पदार्थ के रूप में उतना तेज असर नहीं दिखाता है। हालांकि, यह शरीर के तापमान को कम करने में छाछ से ज्यादा प्रभावी है।कब पीएं सत्तू और कब पीएं छाछ? (सही समय)
किसी भी चीज का पूरा फायदा तभी मिलता है, जब उसे सही समय पर खाया या पिया जाए। सत्तू और छाछ पीने का भी एक सही समय होता है।सुबह के समय (नाश्ते में): सुबह के समय शरीर को दिनभर के लिए एनर्जी चाहिए होती है। इसलिए सुबह सत्तू का शरबत पीना सबसे अच्छा है।
धूप में निकलने से पहले: अगर आप फील्ड वर्क करते हैं, तो घर से निकलने से पहले सत्तू पी लें। यह आपको लू से बचाएगा।
दोपहर के भोजन के बाद: लंच करने के बाद शरीर को खाना पचाने की जरूरत होती है। इस समय एक गिलास छाछ (भुना जीरा और काला नमक डालकर) पीना पाचन को सुधारता है।
शाम के समय: ऑफिस में अगर हल्का और रिफ्रेशिंग कुछ चाहिए, तो शाम को छाछ को अपनी प्राथमिकता बनाएं।
वर्कआउट से पहले: जिम जाने या भारी काम करने से पहले सत्तू पीना चाहिए। यह एक बेहतरीन प्री-वर्कआउट ड्रिंक है।
वजन घटाने (Weight Loss) के नजरिए से क्या है बेहतर?
वजन घटाने वालों के मन में हमेशा यह सवाल रहता है कि डाइट में क्या शामिल करें।अगर आप वजन कम करना चाहते हैं:
आपको अपनी डाइट में छाछ को शामिल करना चाहिए। छाछ में कैलोरी बहुत कम होती है और फैट बिल्कुल नहीं होता। यह हल्की होती है और मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को तेज करती है। छाछ पीने से शरीर का फैट तेजी से बर्न होता है।
अगर आप वजन बनाए रखना चाहते हैं:
अगर आप दुबले-पतले हैं या हेल्दी तरीके से वजन बढ़ाना/बनाए रखना चाहते हैं, तो सत्तू चुनें। सत्तू प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है। यह शरीर में कमजोरी नहीं होने देता। यह मांसपेशियों को रिकवर करने में मदद करता है।
अंतिम निष्कर्ष: अपनी जरूरत के हिसाब से चुनें
सत्तू का शरबत और छाछ, दोनों ही भयंकर गर्मियों के लिए बेहतरीन देसी ड्रिंक्स हैं। दोनों की अपनी-अपनी खासियत है। किसी एक को दूसरे से कम नहीं आंका जा सकता। अगर आपको भयंकर एनर्जी, ताकत और लंबे समय तक पेट भरा हुआ चाहिए, तो बेझिझक सत्तू का शरबत चुनें। यह मेहनत करने वालों के लिए बेस्ट है। लेकिन, अगर आपको हल्कापन चाहिए, तेज हाइड्रेशन चाहिए, पाचन सुधारना है और पेट को आराम देना है, तो छाछ आपके लिए सबसे अच्छी रहेगी। आप चाहें तो दोनों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। सुबह के समय सत्तू पी लें और दोपहर के खाने के बाद छाछ पी लें। सही समय पर सही ड्रिंक चुनकर आप गर्मी की थकान, डिहाइड्रेशन और कमजोरी से बहुत आसानी से बच सकते हैं।अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: क्या हम रोज सत्तू का शरबत पी सकते हैं?उत्तर: हां, आप गर्मियों में रोजाना सत्तू का शरबत पी सकते हैं। यह प्राकृतिक है और शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ लू से भी बचाता है।
प्रश्न 2: क्या छाछ पीने से सच में वजन कम होता है?
उत्तर: हां, छाछ में कैलोरी बहुत कम होती है और यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाती है। इसे पीने से पेट भरा महसूस होता है जिससे आप ज्यादा खाने से बचते हैं और वजन कम होता है।
प्रश्न 3: सत्तू पीने का सबसे अच्छा समय क्या है?
उत्तर: सत्तू पीने का सबसे सही समय सुबह खाली पेट या नाश्ते के समय होता है। इसे पीने से आपको दिनभर के लिए भरपूर एनर्जी मिलती है।
प्रश्न 4: क्या रात के समय छाछ पीना सुरक्षित है?
उत्तर: आयुर्वेद के अनुसार रात में छाछ पीने से बचना चाहिए। रात में खट्टी चीजें और ठंडी तासीर वाली चीजें कफ और सर्दी-खांसी की समस्या पैदा कर सकती हैं।
प्रश्न 5: क्या डायबिटीज के मरीज सत्तू पी सकते हैं?
उत्तर: बिल्कुल पी सकते हैं। सत्तू भुने चने से बनता है जिसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम होता है। यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने में मदद करता है।
प्रश्न 6: सत्तू और छाछ में से ज्यादा प्रोटीन किसमें होता है?
उत्तर: सत्तू में छाछ की तुलना में काफी ज्यादा प्रोटीन पाया जाता है। सत्तू प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का एक बहुत ही शानदार स्रोत है।
प्रश्न 7: क्या खाली पेट छाछ पीनी चाहिए?
उत्तर: खाली पेट छाछ पीने से कुछ लोगों को एसिडिटी की समस्या हो सकती है। इसे हमेशा दोपहर के भोजन के बाद पीना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
प्रश्न 8: ज्यादा पसीना आने पर क्या पीना चाहिए?
उत्तर: बहुत ज्यादा पसीना आने पर तुरंत हाइड्रेशन की जरूरत होती है। ऐसे में इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर छाछ पीना सत्तू की तुलना में ज्यादा तेज असर करता है।
प्रश्न 9: क्या बच्चों को सत्तू का शरबत दे सकते हैं?
उत्तर: हां, बढ़ते बच्चों के लिए सत्तू बहुत फायदेमंद है। यह उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी प्रोटीन और पोषक तत्व प्रदान करता है।
प्रश्न 10: पेट की गैस और कब्ज के लिए क्या बेहतर है?
उत्तर: पेट की गैस के लिए तुरंत राहत पाने के लिए छाछ बेहतर है। वहीं, पुरानी कब्ज को जड़ से खत्म करने के लिए फाइबर से भरपूर सत्तू का नियमित सेवन फायदेमंद है।

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